जिला स्तरीय ६४३ वां गुरू प्रकाश पर्व का धूमधाम रही
District level 643rd Guru Prakash Parva was a fanfare....
संत रविदास के विचारों को ग्रहण करें : सक्सेना
तीन दिवसीय जिला स्तरीय गुरू प्रकाश पर्व के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मेें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना ने कहा कि हमें संत रविदास के विचारों को ग्रहण करना होगा तभी हम धन्य होंगे। उनके बताए मार्ग पर चलना ही जीवन का मूल मंत्र होना चाहिए। कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इससे पहले कार्यक्रमों की श्रंख्ला में प्रात: 5 बजे प्रभात फेरी के बाद गुरूजी महाभिषेक, कीर्तन और महाअरदास हुई। दोपहर 12 बजे से भव्य शोभायात्रा रामबाग से प्रारंभ हुई जो शहर के मुख्य मार्गों का भ्रमण करते हुए पोला ग्राउंड पहुंची। यहां लंगर का आयोजन किया गया। शोभायात्रा में भव्य आतिशबाजी भी की गई। पोला ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डा. हेमंत अहिरवार, पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना, विधायक सुनील उईके, नीलेश उईके, जिला कांग्रेस अध्यक्ष गंगाप्रसाद तिवारी, अमित सक्सेना, जिला भाजपा अध्यक्ष बंटी साहू, डा. टांडेकर, मनोज चौरे मौजूद रहे। कार्यक्रम में अतिथि वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन समिति अध्यक्ष राजकुमार अहिरवार ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में शामिल अतिथियों ने युवक-युवती परिचय पत्रिका का विमोचन भी किया। इस पत्रिका समिति के अध्यक्ष श्याम अहिरवार हैं जिन्होने समाज से सबंधित युवक-युवतियों की जानकारी इस पत्रिका में संजोयी है।

सन्त शिरोमणि रविदास जी ( संक्षिप्त परिचय )...
जन चेतना, जन आन्दोलन, समतामूलक समाज की परिकल्पना, मानव सेवा आदि...क्रान्तिकारी परिवर्तन के लिए सन्त शिरोमणि रविदास ( रैदास ) जी का नाम बड़े आदर तथा सम्मान के साथ लिया जाता है ! रैदास जी सामाजिक सुधार के लिए जीवन पर्यन्त जूझते तथा रचनात्मक प्रयत्न करते रहे हैं ! सामाजिक समानता, समरसता लाने के लिए वो अपनी वाणियों, दोहों के माध्यम से तत्कालीन शासकों को भी सचेत करते रहे ! घृणा और सामाजिक प्रताड़नाओं के बीच सन्त रैदास जी ने टकराहट और भेदभाव मिटाकर प्रेम तथा एकता का संदेश दिया ! उन्होंने जो उपदेश दिये दूसरों के कल्याण व भलाई के लिए दिये और उनकी चाहत एक ऐसे समाज की थी जिसमें राग, द्वेष, ईर्ष्या, दुख, कुटिलता का समावेश न हो !
सन्त रैदास जी के मन में समाज में व्याप्त कुरीतियों के प्रति आक्रोश था ! वह सामाजिक कुरीतियों, वाह्य आडम्बर एवं रूढ़ियों के खिलाफ एक क्रान्तिकारी परिवर्तन की मांग करते रहे ! उनका स्पष्ट मानना था कि जब तक समाज में वैज्ञानिक सोच पैदा नहीं होगी, वैचारिक विमर्श नहीं हो सकता हैं !
आज भी समाज में ऊंच-नीच, छुआछूत बरक़रार है और इसे दूर करने के लिए हमें आगे आना होगा। इसके लिये हमें और समाज को शिक्षित करना होगा। जब तक हम शिक्षित नही होगें, हम अपने इतिहास को कभी नहीं जान पायेगे ! क्योंकि परम पूजनीय बोधिसत्व डॉ. बाबा साहब अंबेडकर जी ने कहा था कि जो समाज अपना इतिहास नहीं जानता वह अपना भविष्य निर्माण नहीं कर सकता।
संत रविदास जी एक महान आध्यात्मिक गुरु थे। वे सम्पुर्ण जीवन समतामूलक समाज निर्माण करने का प्रयत्न करते रहे। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच, छुआछूत, पाखंडवाद एवं मनुवाद का पुरजोर विरोध किया।
संत शिरोमणि रैदास जी कहते हैं:-
ऐसा चाहूं राज्य मैं, जहां मिलै सबन को अन्न।
छोट, बड़ों सभ सम बसै, रैदास रहे प्रसन्न।।
अर्थात रविदास जी कहते हैं कि मैं ऐसा राज्य चाहता हूँ जहाँ सभी को अन्न मिलें कोई भूखा न रहें एवं छोटे-बड़े सभी समान रुप से रहें।
संक्षिप्त में....साथियों ! हमें विचार करना चाहिये कि क्या हमारा वर्तमान वैसा बन सका हैं जिसका सपना रविदास जी ने देखा था, संविधान लागू होने के 70 वर्ष बाद भी मुलनिवासी बहुजनों की सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक हालत बेहतर नही बन सकी, आज भी गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी इत्यादि हैं! हमें सोच-विचार, विचार-विमर्श करना चाहिये कि इन परिस्थितियों के लिये आखिर जिम्मेवार कौन हैं ???
सन्त रविदास जी की 643 वीं जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं कोटि कोटि प्रणाम एवम् नमन


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