ट्रांसफार्मर बदलवाने मजदूर संघ के किसान बैठे विधुत विभाग के सामने, दिया धरना

ट्रांसफार्मर बदलवाने मजदूर संघ के किसान बैठे विधुत विभाग के सामने, दिया धरना

ट्रांसफार्मर बदलवाने मजदूर संघ के किसान बैठे विधुत विभाग के सामने, दिया धरना

ट्रांसफार्मर की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के किसान बैठे विधुत विभाग चौरई के सामने

चौरई - इन दिनों जब किसानों के लिए पानी की अति आवश्यकता है, तो वो बिजली कनेक्शन के माध्यम से अपने-अपने खेतों में सिचाई में लगे हुए हैं, लेकिन बीच में ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण उन्हें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। एक बार ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए एक-एक हफ्ते की मशक्कत के बाद चंदा एकत्रित करके और अधिकारियों से काफी मिन्नते करने पर ट्रांसफार्मर मिल पाता है। जब ट्रांसफार्मर मिलता है तो किसानों को लगता है कि अब उनकी फसलों में आसानी से सिंचाई हो पाएगी, लेकिन उनकी खुशी कुछ दिन ही कायम रह पाती है और ट्रांसफार्मर फिर से जल जाता है। आसपास के ग्रामीण अंचल में पिछले एक माह के अंदर 3 दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतें आई हैं। जले हुए ट्रांसफार्मर तहसील मुख्यालय स्थित बिजली ऑफिस तक किसान इस उम्मीद में ट्रैक्टर ट्राली में लेकर आते हैं कि शायद उन्हें दूसरा ट्रांसफॉर्मर मिल जाएगा, लेकिन ट्रांसफार्मर नहीं मिल पा रहे हैं और उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है।

 

ऐसा ही कुछ हाल नकुलनाथ के संसदीय क्षेत्र तहसील चौरई की ग्राम पंचायत हथोड़ा का है जहां के किसान आज राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के तत्वधान में अपनी मांग को लेकर विधुत विभाग चौरई पहुँच गये जहाँ इनकी मांग थी कि ग्रामपंचायत हतोड़ा में बिजली विभाग द्वारा बारबार 65 एचपी का ही ट्रांफार्मर लगाया जा रहा है जबकि यहाँ 100 एचपी ट्रांफार्मर की आवश्यकता हैं अधिक भार होने के कारण बारबार ट्रांफार्मर जल रहे हैं जिन्हें विधुत विभाग तत्काल ठीक करें एवं 100 एचपी का ट्रांसफार्मर स्थपित करें लेकिन विधुत विभाग इनकी मांगो को नही मान रहा है जिसके चलते किसान अपने खेतों में पानी नही दे पा रहे है जिससे उनको खेती में भारी नुकसान हो रहा हैं।

-जल रहे हैं कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर

ग्रामीण क्षेत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे ट्रांसफार्मर हैं, जो ओवरलोडेड हैं। जिन पर क्षमता से अधिक दबाव है। इस स्थिति में आए दिन ट्रांसफार्मर जल रहे हैं। जानकारी के अनुसार एमपीएसईबी ने किसानों को बड़ी संख्या में सिंचाई के लिए अस्थाई कनेक्शन दे दिए हैं, जिससे विद्युत खपत में बहुत अधिक भार हो गया है। जबकि ट्रांसफार्मर की क्षमता विद्युत खपत कम है। यदि समय रहते विद्युत खपत के मुताबिक ट्रांसफार्मर रखे गए होते तो उनके बार-बार जलने की समस्या नहीं आती। लेकिन ऐसा नहीं किया गया यहां 100 केवी के ट्रांसफर लगाए जाने चाहिए थे 65 केवी की क्षमता के ट्रांसफर लगाए गए ।


इस संबंध में कनिष्ठ अभियंता शंकरलाल चौरासिया का कहना है कि किसान चोरी छिपे डारेक्ट लाईन लेकर मोटर चला रहे हैं जिससे कारण अधिक लोड होने से ट्रांसफार्मर कभी-कभी जल जाते हैं । जलने पर उन्हें जल्दी बदलने की व्यवस्था इतने जल्दी नही की जा सकती हैं। फिर भी हम कल तक जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने का प्रयास कर रहें हैं।