इन पेड़ और पर्यावरण का हत्यारा कौन ? एक तरफ विकास, दूसरी तरफ प्रकृति को नुकसान, शहर कैसे बनेगा स्मार्ट.....?

Who is the killer of these trees and environment? Development on one side, damage to nature on the other, how will the city become smart .....?

इन पेड़ और पर्यावरण का हत्यारा कौन ? एक तरफ विकास, दूसरी तरफ प्रकृति को नुकसान, शहर कैसे बनेगा स्मार्ट.....?
रिपोर्ट : दुर्गेश नरोटे, CTN भारत छिंदवाड़ा
  • इन पेड़ और पर्यावरण का हत्यारा कौन ?
  • एक तरफ विकास, दूसरी तरफ प्रकृति को नुकसान, शहर कैसे बनेगा स्मार्ट.....? 

छिन्दवाड़ा।  शहर इन दिनों स्मार्ट सिटी बनने के मार्ग पर बड़ी तेजी से अग्रसर है, हर तरफ अनेको नए निर्माण कार्यो का दौर जारी है, खजरी चौक से लालबाग चौक तक मॉडल सड़क हो या हाईटेक व्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम के लिए सिवर लाईन हो या बेहतर यातायात के लिए टीव्ही सेनेटोरियम में आरओबी ब्रिज सहित मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित अन्य विकास कार्य जारी है, एक्सपर्ट की माने तो इन कार्यो के पूरा होते ही शहर मिनी स्मार्ट सिटी बनने के मार्ग पर अपना पहला कदम आगे बड़ा देगा, मगर कोई भी शहर बड़े बड़े निर्माण से ही स्मार्ट नही कहलाता, किसी भी शहर को स्मार्ट बनाने में वहा के स्थानीय पर्यावरण की भी अहम भूमिका होती है, स्मार्ट शहर  के लिए विकास के साथ साथ प्राकृतिक सुंदरता भी जरुरी है, शहर में बड़े बड़े निर्माण कार्यो के नाम पर ठेकेदार यहा के शुद्ध सवच्छ पर्यावरण के साथ प्रकृति को बड़ा नुकसान पहुचा रहे है, निर्माण कार्यो के नाम पर वर्षो पुराने बड़े बड़े हरे भरे पेड़ो को बड़ी ही बेरहमी से जमीदोज किया जा रह है, इससे शहर की प्राकृतिक सुंदरता भी ख़राब हो रही है, सिम्स के निर्माण की बात हो या मॉडल सड़क की या आरओबी हर जगह निर्माण एजेंसियों  द्वारा बड़ी संख्या में सालो पुराने सैकडो पेड़ो को काट दिया गया है, कई जगह फायदे के लिए अनुमति से ज्यादा पेड़ो की भी बलि दे दी गई है, 

बड़ा सवाल ! क्या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर  शहर स्मार्ट सिटी बन पायेगा....?

ताजा मामला परासिया रोड का है यहा विगत दिनों पोआमा चौक से लेकर इंदिरा तिराहे तक सड़क चौडी करण हेतु कार्य प्रारम्भ हुआ है, इस मार्ग को टू-लेन से फ़ोर लेन में परिवर्तित किया जा रहा है, सड़क चौडी करण के चलते सर्किट हॉउस चौराहे से लेकर षष्टी माता मंदिर के मध्य शहर के बिच में घनी आबादी के मध्य लगे सैकडो साल पुराने हरे भरे बड़े पेड़ो को काटा जा रहा है जो की आगे चलकर पर्यावरण के साथ साथ आस पास रहने वाले लोगो के लिए नुकसान दायक साबित हो सकता है, एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारे स्वच्छ और शुद्ध हवा के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने हेतु लोगो को जागरूक कर रही है, वृक्षा रोपन के लिए बड़े बड़े अभियान चलाये जा रहे है जिस पर लाखो करोडो रुपये का ख़र्चा किया जा रहा है, अभी हाल में जिला पंचायत के मार्गदर्शन में नैनो प्रोजेक्ट के तहत 6 लाख पौधो में करोडो खर्च किये गए  वही दूसरी तरफ छिन्दवाड़ा में सड़क चौडी करण के नाम पर कई सालो पुराने पेड़ो की बलि दी जा रही है, क्या शासन प्रशासन केवल इसलिये पेड़ पोधो लगाते है की बड़ा होकर अपने स्वार्थ के उसे काट दिया जाता है  जो लोगो के स्वास्थ के लिए भी हानिकारक है, शहर को अगर स्मार्ट बनाना है तो विकास कार्यो के साथ साथ पर्यावरण और प्राकृतिक  सुंदरता को बचाने के लिए भी विशेष रूप से ध्यान दिये जाने और जरुरी कदम उठाये जाने के साथ सभी को इसके लिए प्रयास किये जाने की जरुरत है। 

कार्य के दौरान बरती जा रही है लापरवाही....

बड़े बड़े पेड़ कटाई के दौरान न तो लोगो की सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है और न कार्य करने वाले कर्मचारियों का, चालू यातायात के बिच ही पेड़ काट कर सड़क पर गिराये जा रहे है, कार्य में लगे कर्मचारी भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के बिजली के तारो के बिच काम करते दिखाई पड़ रहे है, पुरे काम में निर्माण एजेंसी की लापरवाही साफ दिखाई दे रही है यह लापरवाही किसी की जान भी ले सकती है, जिम्मेदार अधिकारियो को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और कार्य के दौरान आमजन की सुरक्षा को देखते हुए पेड़ कटाई के दौरान बैरिकेट्स सहित सुरक्षा के पुकता इंतजाम किये जाने हेतु निर्माण एजेंसी को आदेशित किया जाना चाहिए।

लगाये जाये दो गुने पेड़....

सड़क चौडी कारण के दौरान जितने भी पेड़ काटे जा रहे है निर्माण एजेंसी से उससे  दो गुने वृक्ष किसी अन्य खुले स्थान पर लगवाये जाने चाहिए, साथ ही वृक्षो के बड़े होते तक उनकी देख-रेख सहित सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी भी निर्माण एजेंसी की ही होना चाहिए, जितने पेड़ काटे जा रहे है उससे दो गुने लगाये भी जाये और अगर निर्माण एजेंसी ऐसा नही करती है तो नियम अनुसार कार्यवाही भी प्रशासन को और से होनी चाहिए।

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दीपक कोल्हे / अनिमेष सिंग ,एडिटर CTN भारत