मंत्रिमंडल विस्तार - सरकार बचाना और अपनों को मनाना शिवराज के लिए बड़ी चुनौती
Cabinet expansion - saving the government and persuading loved ones a big challenge for Shivraj
मंत्रिमंडल विस्तार - सरकार बचाना और अपनों को मनाना शिवराज के लिए बड़ी चुनौती
भोपाल से लेकर दिल्ली तक चले महामंथन के बाद 100 दिन पूरे कर चुकी प्रदेश की शिवराज सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet expansion) एक बार फिर टल गया है। इसका कारण सिंधिया समर्थक, शिवराज की पसंद, प्रदेश इकाई और हाईकमान की असहमति बताया जा रहा है।माना जा रहा है कि सिंधिया समर्थकों को ज्यादा जगह, विभागों का बंटवारा और कुछ भाजपा विधायकों को शामिल करने के चलते पेंच फंस गया है। वही हाईकमान के वरिष्ठों के बजाय युवाओं पर ज्यादा फोकस ने विस्तार को बीच मझधार में अटका दिया है।हालांकि शिवराज, वीडी शर्मा और सुहास भगत बीच का रास्ता निकालने में लगे हुए है, मैराथन बैठकों का दौर चल रहा है, ताकी बिना नाराजगी के विस्तार हो जाए, जिसमें हाईकमान की भी मर्जी शामिल हो। इधर, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल आज मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी लेने जा रही है, देर शाम उनका शपथ ग्रहण समारोह होना है,ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि अब ज्यादा देरी ना करते हुए एक दो दिन बाद शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है।इसके लिए शिवराज एक बार और दिल्ली दरबार में हाजिरी भी लगा सकते है या फिर हाईकमान की तरफ से कोई संदेशा आ सकता है।
दरअसल, एक तरफ बीजेपी के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, विश्वास सांरग,यशोधरा राजे सिंधिया जैसे डेढ दर्जन नाम मंत्री बनने की कतार में है, वही दूसरी तरफ चुनी हुई कमलनाथ सरकार का पतन करके आए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक मंत्री पद की शर्त पर समर्थन में है, वो किसी भी समझौते के मूड में नही है, ऐसे में सिंधिया के 11 लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल होना तय माना जा रहा है। इसमें इमरती देवी, प्रदुम्नन सिंह तोमर जैसे नाम शामिल है, वही पिछली सरकार में मंत्रीपद से वंचित रहे वरिष्ठ नेता बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना, हरदीप डंग और रणवीर जाटव भी आस में बैठे है।समर्थन के दौरान भाजपा और सिंधिया खुद इन्हें मंत्री बनाने का आश्वासन दे चुकी है। अगर इन सब को मंत्री बनाया जाता है कि भाजपा के पास जगह कम बचेगी, ऐसे में कुछ ही भाजपा विधायक कैबिनेट में शामिल हो पाएंगे औऱ बाकी बाहर हो जाएंगे। इसी बीच खबर है कि विभागों को लेकर भी अडचन आ रही है, महाराज बड़े विभागों के फेवर में है, वही उपचुनाव को भी ध्यान में रखते हुए पार्टी को जातिगत समीकरण साधना है, चुंकी मंत्रिमंडल मंडल में भी 32 से ज्यादा मंत्रियों को शामिल नही किया जा सकता है।इधर, हाईकमान युवाओं को मौका देने और सिंधिया समर्थकों के साथ कोई बदलाव करने के मूड में नही। ऐसे में शिवराज, वीडी शर्मा और सुहास भगत के साथ दोबारा बैठकें करके बीच का रास्ता निकलने में जुटे है, डिप्टी सीएम के फार्मूले पर मंथन है, बैकअप के तौर पर निगम मंडल जैसे कई पदों पर नियुक्ति पर भी विचार चल रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा है कि शिवराज अपने कुनबे में किसको शामिल कर पाते है और किसको नही।
सरकार बचाना और अपनों को मनाना शिवराज के लिए बड़ी चुनौती
आने वाले समय में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद होने वाली फूट और अंतर्कलह शिवराज के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। वही उपचुनाव में ज्यादा सीटे जीतकर अपनी सरकार को बचाना भी बड़ा टास्क है।अगर मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विधायकों के बागी तेवर देखने को मिलते है तो ग्वालियर चंबल में जहां 16 सीटे है, जीत मुश्किलें हो सकती है। कहा जाता है कि इंसान को गैरो से ज्यादा अपनों का भय सताता है, ऐसा ही यहां भी है।वही निर्दलीयों, सपा-बसपा को भी साधना है।इधर कांग्रेस भी कमबैक का दावा कर रही है और इंतजार में है कि कब मंत्रिमंडल का विस्तार हो और फूट का फायदा उनकी पार्टी को मिले। कांग्रेस शिवराज सरकार के साथ भी वही खेल खेलना चाहती है जो 100 दिन पहले बीजेपी ने कमलनाथ सरकार के साथ खेला गया है। कांग्रेस जैसे को तैसा की लाइन पर है, अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस के लिए उपचुनाव से पहले संजीवनी मिल सकती है, वही शिव के लिए विष पीना।खैर देखना दिलचस्प होगा कि महिनों पहले राजनीति में उठे तूफान का असर आने वाले दिनों में कितना होता है, इससे बीजेपी या फिर कांग्रेस को कितना फायदा मिलता है।
आनंदीबेन पटेल आज लेंगी शपथ
सियासी उठापटक के बीच उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के आज बुधवार को भोपाल आने की संभावना है। खबर मिल रही है कि वो आज दोपहर बाद भोपाल आएंगी और शाम 4.30 बजे मप्र के प्रभारी राज्यपाल की शपथ लेंगी।वही कैबिनेट के लिए नामों पर मुहर लगते ही राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भोपाल आने की चर्चा है।


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