नशे में खुद को तलाशता आज का युवा
Parents should spend at least one day a week with their children. Try to understand their mind. See what they are expecting from you. See his friends, see who he is and most importantly before giving money, know where and how he will spend that money.
नशे में खुद को तलाशता आज का युवा
किसी भी देश का भविष्य उसके आने वाली पीढ़ी यानी युवाओं पर निर्भर करती है। लेकिन आज का युवा वर्ग एक चिंता का विषय बन गया है। नशे का आदी हो चुका यह वर्ग अपने आप को इस कदर इसका आधी कर चुका है मानो कि वह इसके बगैर एक दिन नहीं रह सकता ।अपने भविष्य के लक्ष्य से भटकता युवा ना जाने अपने सपनों को क्यों इस नशे में तलाश रहा है। विद्यार्थी जीवन में पढ़ाई करते- करते कब ये इसके आदि हो जाते हैं ।उनको पता ही नहीं चलता और जब उनके अभिभावक को पता चलता है। तब तक काफी देर हो चुकी होती हैं।तब शायद कुछ किस्मत वाले होते हैं जो इलाज के बाद अपनी जिंदगी फिर से समान रूप से जीने की कोशिश करने लगते हैं। लेकिन सबकी जिंदगी उसे दोबारा समान होने का मौका दे ये मुमकिन नहीं है ।
नशे में भी कई श्रेणी होने से आज के युवा की पहुंच में काफी आसान हो गया हैं या फिर इसको कहा जाए कि युवाओं ने खुद इसकी खोज कर ली है। आपके आसपास घर, दुकान या दफ्तर कहीं भी ठेलो में कोई न कोई धूम्रपान करते हुए आप लोगों को दिखते होंगे। शराब के नशे में आज की युवा पीढ़ी को जकड़ लिया है ।कोई भी पार्टी बिना शराब के नहीं होती जाम के जाम छलकाए जाते हैं। फिर वह युवक हो या युवती दोनों ही इसके शिकार हैं। नशे में झूमते हुए अपनी जिंदगी अपने हाथों से बर्बाद करते हुए युवा देखे जा सकते हैं। देखने योग्य बात यह है किस सिगरेट, गुटके और शराब के ऊपर साफ शब्दों में लिखा होता है इनका सेवन सेहत के लिए हानिकारक है और कर्क रोग हो सकता है। फिर भी बहुत ही आसानी से नजर अंदाज करते हुए दिन में कई बार इसका सेवन करते हैं और वह भी पूरी कीमत अदा करते हुए। जिसकी जैसी हैसियत वह उस तरह का नशा खरीदता है कई और प्रकार के नशे हैं जो जिसको मिल जाए और अगर ना मिले तो फिर उसको पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है। फिर चाहे इसके लिए कोई जुर्म ही क्यों ना करना पड़े ।उसे तो बस नशा चाहिए।
कारण समझने की कोशिश करते हैं
माता-पिता का काम काजू होना बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी आया या घर के किसी अन्य सदस्य के हाथों में दे देना। पिता का भी व्यस्त रहना बचपन से जवानी तक दोनों में से किसी के पास समय ही नहीं था कि वह जान पाए बच्चा क्या चाहता है ।उसकी क्या परेशानी है। यह देख सके कि वह किस की संगत में है वह अच्छे हैं या बुरे हम जो पैसे दे रहे हैं वह कहां खर्च कर रहे हैं।

क्या कर सकते हैं
माता-पिता को कम से कम हफ्ते में एक दिन अपने बच्चों के साथ बिताना चाहिए। कोशिश करें कि उनके मन की बात समझ सकें । देखे कि वह आपसे क्या अपेक्षा कर रखे हैं। उनके दोस्तों से मिले देखें कि वह कौन है और सबसे जरूरी बात पैसे देने से पहले यह जाने कि वह उस पैसे को खर्च कहां और कैसे करेंगे।


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