प्रदेश के मुखिया के गृह जिले के हालत बयां करता - एकलव्य विद्यालय

प्रदेश के मुखिया के गृह जिले के हालत बयां करता - एकलव्य विद्यालय

प्रदेश के मुखिया के गृह जिले के हालत बयां करता - एकलव्य विद्यालय

प्रदेश के मुखिया के गृह जिले के हालत बयां करता - एकलव्य विद्यालय

 

एपिसोड क्र 3

 

⚫एकलव्य विद्यालय, जुन्नारदेव की कलयुगी दास्तान

????प्रभारी प्राचार्य और छात्रावास अधीक्षक ने स्कूल को बनाया पर्यटन केंद्र

????एकलव्य विद्यालय में परोसा जा रहा गुणवत्ताहीन भोजन

????प्रशासनिक नियंत्रण की कमी से व्यवस्थाएं हो रही बद से बदतर

????जुन्नारदेव
इस आदिवासी विधानसभा जुन्नारदेव के आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए विकास और उत्थान के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के अथक प्रयासों से स्थापित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में अब उनकी ही छवि को लगातार धूमिल किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। एकलव्य सोसाइटी के द्वारा संचालित किया जाने वाला इस विद्यालय में लगातार नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। यही कारण है कि इस विद्यालय के आदिवासी छात्र छात्राओं के नैतिक, आध्यात्मिक और शारीरिक उत्थान के स्थान पर वह निरंतर कमजोर होते जा रहे हैं। इसके प्रमुख रूप से जिम्मेदार यहां के वर्तमान में प्रभारी प्राचार्य और छात्रावास अधीक्षक की विवादित कार्यप्रणाली रही है। इस विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य के द्वारा अपना मुख्यालय पर ना रहना इसका बड़ा कारण बन गया है। यही कारण है कि इस विद्यालय के बिगड़े हालात लगभग नियंत्रण के बाहर पहुंच चुके हैं। प्रभारी प्राचार्य के द्वारा इस विद्यालय को स्वयं के लिए एक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर लिया गया है। वह अपने लिए परिसर में निर्मित आवास में प्रति दिवस ना रहते हुए जिला मुख्यालय में खुद के निजी आवास में ही निवास कर अपने पद का दुरुपयोग कर संचालन कर रहे हैं। कमोबेश ऐसी ही हालात उनके मातहत कर्मचारी छात्रावास अधीक्षक का भी है, जो निरंतर ही अपने नैतिक दायित्वों के निर्वहन के स्थान पर कथित तौर पर लापरवाही करते नजर आ रहे हैं। जिसके कारण आदिवासी छात्र छात्राओं के नैतिक, शारीरिक और अकादमिक भविष्य के निर्माण पर प्रश्नचिन्ह लगता नजर आ रहा है। प्रभारी प्राचार्य की इसी लापरवाही के चलते इस आदर्श विद्यालय के बिगड़े हालात में यहां अध्ययनरत आवासीय परिसर में छात्रों को गुणवत्ताहीन भोजन प्राप्त हो रहा है। जिसके चलते उनकी शारीरिक कमजोरी को भलीभांति देखा जा सकता है। प्रभारी प्राचार्य के नियंत्रण ना होने के कारण ही विद्यालय में ना सिर्फ भोजन बल्कि शिक्षा का स्तर भी निरंतर गिरावट की ओर अग्रसर है। जिसके कारण आदिवासी छात्र और छात्राओं का निरंतर पतन हो रहा है, जोकि प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की आकांक्षाओं के सर्वथा विपरीत है। प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की इन भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले प्रभारी प्राचार्य को जिला प्रशासन के द्वारा लगातार प्रोत्साहन दिया जाना को एक सोची समझी राजनीतिक सोच करार दिया जा सकता है।

????गुणवत्ताहीन भोजन पर बरसे पालक.....
घटिया सामग्री से भोजन निर्माण किए जाने के आरोप की सत्यता उस समय उजागर हो जाती है कि जब बीते दिनों अचानक ही विद्यालय परिसर में पहुंचे आदिवासी पालक ने पुत्र के लिए बनाए गए भोजन को चखने का प्रस्ताव अधीक्षक के सामने रखा। इस भोजन को देखकर आदिवासी छात्र के पिता जमकर कुपित हो गए और उन्होंने भोजन की गुणवत्ता पर सवालिया निशान ही लगा दिया। अपना नाम प्रकाशित ना किए जाने की शर्त पर उन्होंने कहा कि इस एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में शासकीय मानदंडों का लगातार मजाक उड़ाया जा रहा है। वर्तमान प्रबंधन को उन्होंने पूरी तरह से बदल दिए जाने की बात भी कही है।