महाराष्ट्र में बेकाबू कोरोना छिन्दवाड़ा के लिए न बन जाए आफत..? प्रशासन सुस्त, रोकथाम के लिए अब तक नही उठाए जरुरी कदम
Uncontrolled Corona in Maharashtra should not become a problem for Chhindwara ..? Sluggish administration, yet no necessary steps taken for prevention.
महाराष्ट्र में बेकाबू कोरोना छिन्दवाड़ा के लिए न बन जाए आफत..? प्रशासन सुस्त, रोकथाम के लिए अब तक नही उठाए जरुरी कदम
- महाराष्ट्र के आधा दर्जन जिले लॉकडाउन की जद में, कई जिलो में नाईट कर्फ्यू और अन्य बंदिशे लागु
छिन्दवाड़ा। जिले की सीमा से लगे महाराष्ट्र के नागपुर, अमरावती, गोंदिया के साथ वर्धा, यवतमाल, अकोला सहित अन्य जिलो में कोरोना संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। हालत ये है कि महाराष्ट्र के स्थानीय प्रशासन को कई जिलों में सम्पूर्ण लॉकडाउन, नाईट कर्फ्यू की घोषणा करनी पड़ी है, ताकि बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके, लेकिन वहीं दूसरी ओर छिंदवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा महादेव मेले की तैयारी की जा रही है। जबकि महादेव मेले में सबसे ज्यादा श्रद्धालु महाराष्ट्र से ही आते हैं। सतपुड़ा की पहाड़ियों में महाशिवरात्रि के 15 दिन पहले से महादेव मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें छिंदवाड़ा, बैतूल, नरसिंहपुर, होशंगाबाद सहित महाराष्ट्र के आधा दर्जन जिलों से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। कोरोना संक्रमण के मामले में महाराष्ट्र फिर दुबारा हाट-स्पॉट बन गया है।सबसे ज्यादा मरीज देश भर में महाराष्ट्र से निकलकर सामने आ रहे है। ये स्थिति है कि पिछले एक सप्ताह में तेजी से कोविड मरीजों की संख्या महाराष्ट्र में बढ़ रही है। ऐसे में जिले में संक्रमण न फैले, इसके बचाव के उपाय करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।

80 प्रतिशत श्रद्धालु आते है महाराष्ट्र से
महादेव मेले में शामिल होने के लिए 80 प्रतिशत श्रद्धालु महाराष्ट्र से ही आते है, महाराष्ट्र के एक दर्जन से भी ज्यादा जिलो से भक्त यहा पहुचते है, ये वही जिले है जहां इन दिनों कोरोना बेकाबू होता दिखाई दे रहा है, ऐसे में इस वर्ष महादेव मेला करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनोती होगा, महाशिवरात्रि में अभी भले ही समय है मगर महाराष्ट्र की तरफ से श्रद्धालुओं की आवा जाही शुरू हो चुकी है, यह आवा जाही बिना किसी जाच रोक टोक और कोरोना गाइडलाइन के पालन को नजर अंदाज करते हुए हो रही है, आगे आने वाले दिनों में यह छिन्दवाड़ा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है, मेला शिवरात्रि के पंद्रह दिन पूर्व से शुरू होकर शिवरात्रि के पंद्रह दिनों के बाद तक चलता है, इन्ही सब बातो को देखते हुए और कोरोना वायरस की रोकथाम को मद्देनजर रखते हुए समय रहते छिन्दवाड़ा जिला प्रशासन को सही और उचित कदम उठाने चाहिए।
कोरेंटाइन सेंटर बंद, चेक पोस्ट हटे, मास्क नही पहनने वालो पर कार्यवाही हुई बंद
महादेव मेले में महाराष्ट्र से आने वाले लाखों श्रद्धालु जिले के लिए घातक साबित हो सकते हैं। महाराष्ट्र में जिस तेजी से कोरोना फैल रहा है, उससे जिले में भी कोरोना का संक्रमण बेतहाशा बढ़ सकता है। यदि जिले में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता है तो इससे निपटने स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार नहीं है कोरोना से निपटने ब्लॉक स्तर पर बनाए गए कोविड केयर सेंटर पहले ही बंद कर दिए गए हैं। कोरोना से युद्ध के लिए तैनात स्वास्थ्य अमला कम कर दिया गया है। जिले की सीमाओं से कोरोना जांच पाइंट हटा लिए गए हैं वहीं दूसरी बड़ी समस्या यह है कि जिले वासियों ने भी यह मान लिया है कि कोरोना खत्म हो चुका है। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सेनेटाइजर व हाथ धोने जैसे कोरोना से बचाव के उपाए करना भी छोड़ दिए हैं। वही प्रशासन भी ढीला पड़ चूका है, न कही रोक टोक हो रही है और नही बिना फेस मास्क के घूमने वाले लोगो पर कोई कार्यवाही हो रही है, नियम गाइडलाइन बस कागजो तक ही सीमित है, भले ही प्रशासन महादेव मेले के लिए नियमो के साथ गाइडलाइन बनाने की बात कर रहा है मगर बड़ा सवाल है की उसका कितना और कहा तक पालन होगा ये देखने वाली बात होगी, जिले में प्रशासन की सुस्ती और ढिलाई का परिणाम है कि अब रोजाना बड़ी संख्या में मरीज कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं।
ये कारण छिन्दवाड़ा की बढ़ा सकते है चिंता
महादेव मेले की तैयारी - जिले में महादेव मेले की तैयारी शुरू हो गई है। इस मेले में सबसे ज्यादा मरीज महाराष्ट्र से आते हैं। यदि ऐसे ही हालात रहे तो जिले में भी संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हो सकता है।
ट्रेन मार्ग की शुरूआत - नागपुर से आवाजाही शुरू होने के बाद ये तो तय है कि बड़ी संख्या में लोग यहां से यात्रा करेंगे।ऐसे में संक्रमित मरीजों का भी बढ़ना तय है।
जांच में लापरवाही - महाराष्ट्र में मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद भी जिला स्तर पर जांच की कोई व्यवस्था नहीं की गई। महाराष्ट्र मध्यप्रदेश सीमा में भी ये देखने वाला कोई नहीं है कि यात्री वाहनों का संचालन कोविड गाइडलाइन के मुताबिक किया जा रहा है या नहीं।
जिला प्रशासन सुस्त, कागजो तक सिमित कोविड नियमो का पालन
छिन्दवाड़ा से लगे महाराष्ट्र के जिलो में लगातार विकराल होते कोरोना और लॉकडाउन के बावजूद अब तक छिन्दवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा न तो अब तक कोई अलर्ट जारी किया गया है और न की कोई गाइडलाइन बनाई गई है, नागपुर, अमरावती जैसे महाराष्ट्र के जिलो से रोजाना बड़ी संख्या में आवा जाही बिना किसी रोक टोक के हो रही है, बसो में कही भी कोरोना गाइडलाइन का पालन नही हो रहा है, जिला प्रशासन की सुस्त कार्यप्रनालि कही न कही कोरोना को फिर आमन्त्रण देती दिख रही है, प्रशासन जरा भी गंभीर नजर नही आ रहा है, अगर सही समय रहते प्रशासन नही जागा तो आने वाले दिनों में छिन्दवाड़ा में भी लॉकडाउन जैसे हालात से इंकार नही किया जा सकता।
क्या कहते है महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की सभी बैठकें ऑनलाइन होंगी. उन्होंने कहा कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए अगले 8 दिन बेहद जरूरी हैं, कोविड-19 महाराष्ट्र में दोबारा अपना सिर उठा रहा है, आठ से 15 दिन में पता चलेगा कि क्या यह दूसरी लहर है. ठाकरे ने कहा कि "हम किसी भी सिंगल मशीनरी पर ज्यादा भार नहीं डाल सकते हैं. हमें जिम्मेदारी लेनी होगी. हम एक नए कैंपेन की शुरुआत कर रहे हैं- 'I am Responsible' मैंने नीति आयोग की बैठक में काम के समय को लेकर सुझाव दिया. अलग-अलग काम का समय, वर्क फ्रॉम होम, सैनिटाइजर्स का इस्तेमाल और सोशल डिस्टेंसिंग हमारे नए अभियान का हिस्सा होंगे." ठाकरे ने कहा कि मास्क पहनें और लॉकडाउन को ना कहें.


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