टूटे ब्रेकर, खुदी सड़के, अधूरे वीआईपी रोड के सीवर , गुणवत्ताहीन चेकर से क्या बनेगा स्मार्ट सिटी ????

Sanitation Campaign 2021 Smart City of Chhindwara now confined to Flex

टूटे ब्रेकर, खुदी सड़के, अधूरे वीआईपी रोड के सीवर , गुणवत्ताहीन चेकर से क्या बनेगा स्मार्ट सिटी ????
रिपोर्ट। दीपक कोल्हे, दुर्गेश नरोटे, छिंदवाड़ा

टूटे ब्रेकर, खुदी सड़के, अधूरे वीआईपी रोड के सीवर , गुणवत्ताहीन चेकर से क्या बनेगा स्मार्ट सिटी ????

  • स्वच्छता अभियान 2021 छिंदवाड़ा की स्मार्ट सिटी अब सिर्फ फ्लेक्सो में सिमटी

छिन्दवाड़ा। एक तरफ छिन्दवाड़ा को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद चल रही है वही  शहर को स्मार्ट बनाने की दिशा में पूर्व में विभिन्न विकास कार्य किये गए थे । कही सेल्फी पॉइंट का निर्माण किया गया था  तो कही सुंदर पार्क बनाये गए थे तो वही कई इलाको के  तिराहों चौराहो का सौंदर्यकरण किया था । ये निगम की कही न कही एक अच्छी पहल थी जो दर्शाता है की पूर्व में निगम के आला अधिकारियो का काम करने का अपना कुछ अलग तरीका था। हाला की शहर में काम तो अच्छे हुए थे ही परन्तु करोडो का घोटाला भी आम जनता से छुपा नहीं है जो पिछले कुछ महीनो पूर्व भाजपा के नेताओ ने उजागर कर जांच के लिए विषय बनाया था जिसमे शहर के साइन बोर्ड का मामला साफ नजर आता है। खैर ये विषय अभी कहा तक विचाराधीन है वो तो जांच अधिकारी ही जाने।  

हम बात कर रहे वर्तमान की तो फिर से 2021 की स्वछता सर्वेक्षण की दौड़ में छिंदवाड़ा निगम फिर से लग गया है और देखा भी जाये तो कुछ दिनों से निगम कर्मचारी साफसफाई की खानापूर्ति में लगे हुए है।  हालांकि जो बजट पिछले सत्र में स्वछता के नाम पर जिले को मिला था शायद वो बजट अब मिल पायेगा या नहीं वो तो प्रदेश के मुखिया ही जाने। हालांकि जो कुछ पूर्व के अधिकारी ने शहर की खूबसूरती में रौनक लगाई थी अब उसी रौनक में लगी जंग को साफ करने में वर्तमान निगम काम कर रही है। 

टूटे छतिग्रस्त गति अवरोधक बन रहे हादसों का कारण, बाहर निकली किले वाहनों को कर रही पंचर

निगम के घोटालो में एक और "गतिअवरोधक" घोटाले को भी जोड़ा जा सकता है जिसमे ना चाहते हुए भी अनगिनत (पेट तोडू) ब्रेकर लगवाकर लाखो का खेल खेला गया था, खैर इस मामले को अभी तक किसी ने नहीं उठाया।  कुछ दिनों से शहर में बढ़ते सड़क हादसों और तेज गति से दौड़ते वाहनों पर नियंत्रण के उद्देश्य से शहर के मुख्य मार्गो सहित अंदरुनी सड़को पर बड़ी संख्या में गति अवरोधक लगाये गए थे, शहर की कोई भी गली या सड़क ऐसी नही होगी जहा ये गति अवरोधक न लगाये गए हो, मगर आज वही गति अवरोधक सड़क हादसों का कारण बन रहे है, उसकी वजह ये है की लगाये गए ज्यादातर गति अवरोधक छतिग्रस्त हो गए है तो कही कुछ हिस्सा उखड़ने के बद आधे ही बचे है, देखने में आ रहा है की दो पहिया वाहन चालक वाहन की गति कम करने की वजाय जहा से गति अवरोधक उखड गए है उस छोटी से जगह से वाहन निकालने के प्रयास में होते है जिसकी वजह से आये दिन सड़क हादसे हो रहे है, साथ ही टूटे गति अवरोधकों की जो नुकीली किले है वो सड़क में बाहर की तरफ निकल आई है, जो वाहनों को पंचर कर रही है, कई बार तो इन किलो की वजह से चलती गाडियो का टायर फूटने की घटनाये भी हो चुकी है, दो पहिया हो या चौपहिया वाहन इन नुकीली किलो से हादसे का शिकार हो रही है, शहर में  यही स्थिति चौपहिया वाहनों  के साथ भी नजर आ रही है, सबसे ज्यादा परेशानी पैदल सड़क क्रास करने वालो को होती है। विशेष कर नेशनल हाइवे में हर समय सड़क हादसों का अंदेशा बना रहता है, जहा जहा ये स्थिति बनी हुई है उन क्षेत्रों के नागरिको द्वारा कई बार छतिग्रस्त गति अवरोधक को ठीक करने की मांग भी की जा चुकी है, मगर जिम्मेदार विभाग द्वारा अब तक इस दिशा में किसी प्रकार के कोई कदम नहीं उठाये है, जल्द से जल्द इसे ठीक किया जाना चाहिए या फिर छतिग्रस्त गति अवरोधकों को हटा कर नए सिरे से ऐसे गतिअवरोधक लगाये जाने चाहिए जिसमे आम नागरिको के पेट में दर्द ना हो पाए जिससे आये दिन होते सड़क हादसों पर भी रोक लगाईं जा सके।