CM के निर्देश पर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई, सहारा की 30 करोड की 312 बीघा जमीन कुर्क 

Major action of collector on CM's instruction, 312 bigha land attachment of Sahara

CM के निर्देश पर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई, सहारा की 30 करोड की 312 बीघा जमीन कुर्क 
रिपोर्ट। ब्यूरो CTN भारत, ग्वालियर

CM के निर्देश पर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई, सहारा की 30 करोड की 312 बीघा जमीन कुर्क 

ग्वालियर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों के बाद प्रदेश में सक्रिय चिटफंड कंपनियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। अब जिला प्रशासन निवेशकों का पैसा वापस नहीं करने वाली चिटफंड कंपनियों की जमीनों को कुर्क करने की कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में आज ग्वालियर कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने सहारा ग्रुप  की 30 करोड़ रुपये की 312 बीघा जमीन कुर्क कर ली हैं।

निवेशकों का पैसा वापस दिलाने के उद्देश्य से ग्वालियर जिले में स्थित सहारा ग्रुप की लगभग 312 बीघा जमीन कुर्क कर ली गई है। कुर्क की गई जमीन की कीमत लगभग 30 करोड़ रूपए आंकी गई है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम के तहत इस आशय का आदेश जारी किया है। साथ ही कुर्क की गई सम्पत्ति को नीलाम करने एवं इस आदेश को कन्फर्म कराने के लिये जिला एवं सत्र न्यायालय और विशेष न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी नोडल अधिकारी चिटफंड को दिए हैं। जिला प्रशासन को शिकायतों की जाँच में पता चला था कि सहारा कंपनी द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति व पंजीयन के बगैर जनता से धन की उगाई की गई है और मैच्युरिटी के बाद भी निवेशकों का धन वापस नहीं किया जा रहा है।

अपर जिला दण्डाधिकारी एवं नोडल अधिकारी चिटफंड टी एन सिंह ने बताया कि सहारा ग्रुप (Sahara Group) (सहारा परिवार) द्वारा अलग-अलग नामों से विभिन्न कंपनियां व कॉपरेटिव सोसायटी संचालित की जा रही हैं। जिनमें मुख्यत: सहारा इंडिया कॉमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, सहारा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी, सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट रेंज लिमिटेड, सहारा स्टार्स मल्टीपरपज कॉपरेटिव सोसायटी एवं ऐलिटू एस्टेट एण्ड फायेनेंस प्रा.लि. शामिल हैं। उन्होंने बताया कि निक्षेपकों (निवेशकों) से प्राप्त शिकायतों की प्रारंभिक जाँच के बाद यह पाया गया है कि सहारा ग्रुप द्वारा निवेशकों से प्राप्त धनराशि से सहारा के नाम से सम्पत्तियां न खरीदकर विभिन्न कंपनियों के नाम से एवं साझेदारी (पार्टनरशिप डीड) कर खरीदी गईं हैं।