सर्दी खासी से पीड़ित को डॉक्टर ने बताया कोरोना संदिग्ध.
After this whole incident happened somewhere, it has become clear that there is a lack of cohesion and mutual coordination between the district hospital management and the doctors. First by the doctor calling the patient a corona suspect and then later being denied by the hospital management. During the same press conference, something similar was seen where the officers and doctors related to the management were getting entangled among themselves regarding the quality and quality of the mask.
सर्दी खासी से पीड़ित को डॉक्टर ने बताया कोरोना संदिग्ध.......
बाद में अस्पताल प्रबन्धन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किया खंडन.......
छिन्दवाड़ा- जिला अस्पताल में कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज पाये जाने की खबर के बाद रविवार की दोपहर पुरे जिले में हड़कम्प मच गया। आम जन तो आम जन जिला प्रशासन भी खबर लगते ही सकते में आ गया। जैसे ही ये खबर अस्पताल से निकल कर सोशल मिडिया में वायरल हुई और कुछ ही देर में हजारो लोगो तक पहुच गई जिसके बाद जिले में हर तरफ कोरोना संदिग्ध की खबर चर्चा का विषय बन गई, लोगो में डर का माहौल व्याप्त हो गया। कोरोना संदिग्ध पाये जाने की खबर के बाद छिन्दवाड़ा के साथ साथ प्रदेश की राजधानी भोपाल तक हलचल मच गई। हुआ ये की रविवार को दोपहर कोरोना वायरस के लक्षणों की आशंका के चलते परासिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती एक युवक को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। जिसे इमरजंसी 108 एंबुलेंस के स्टाफ ने छिन्दवाड़ा जिला चिकित्सालय पहुचाया। जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने उसमे पाये गए लक्षण सिम्टम्स को देखते हुए कोरोना संदिग्ध मानकर कोरोना वायरस पीड़ित मरीज के लिए जिला अस्पताल में बनाये गए स्पेशल आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कर दिया।
देर शाम अस्पताल प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियो ने सयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोरोना संदिग्ध पाये जाने की खबर का किया खंडन।
कोरोना संदिग्ध पाये जाने की खबर के बाद बने हड़कम्प के माहौल के बीच देर शाम जिला प्रशासन, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार अधिकारियो ने सयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस खबर का सिरे से खंडन किया और ऐसा कोई भी मरीज पाये जाने की बात को नाकारा। सभी जिम्मेदार अधिकारियो ने बताया की परासिया क्षेत्र से रिफर होकर एक मरीज इलाज हेतु जिला अस्पताल आया है। डॉक्टर द्वारा कोरोना संदिग्ध होने की जानकारी दिए जाने के बाद विशेष एक्सपर्ट डॉक्टरों द्वारा उक्त मरीज की जाच कराई गई है। जाच में उक्त मरीज विगत कुछ दिनों से सर्दी खासी और साधारण बुखार की शिकायत से ग्रसित पाया गया है और इसकी स्थिति भी बिलकुल नॉर्मल है इसमें कोरोना से सम्बंधित किसी भी प्रकार के कोई लक्षण नही पाये गए है। भर्ती मरीज की किसी भी प्रकार की कोई हिस्ट्री नही है न वो कभी विदेश गया है और न किसी विदेशी से संपर्क में आया है तो ऐसे में फिर कोरोना की सम्भावना बिलकुल ना के बराबर ही है। फिर भी ऐतियात के तौर पर उसके पुरे टेस्ट कराये जायेंगे और पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक डॉक्टर की निगरानी में रखा जायेगा। साथ ही प्रशासन ने जिले की जनता से अपील की है की घबराने की कोई आवशयकता नही है जिले में कही भी न तो कोई कोरोना वायरस पीड़ित मिला है और न कोई संदिग्ध मिला है। बस थोड़ी सी सावधानी बरतने भर से इस्से बचा जा सकता है। दिन में कई बार अच्छे से हाथ धोये और भीड़ भाड़ वाली जगह पर जाने से बचे साथ ही घर से बाहर जाये तो मास्क का प्रयोग करे। इस दौरान जिम्मेदार अधिकारियो ने उक्त मरीज को कोरोना संदिग्ध बताये जाने वाले डॉक्टर पर कार्यवाही की बात भी कही। प्रशासन द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख़्य रूप से छिन्दवाड़ा ADM राजेश शाही, जिला स्वास्थ अधिकारी प्रदीप मोजेस, मेडिकल कॉलेज डीन रामटेके सहित सिविल सर्जन एव अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौजूद थे।
कही न कही आज हुई इस पूरी घटना के बाद ये बात तो साफ हो गई है की जिला अस्पताल प्रबन्धन और डॉक्टरों के बीच कही न कही सामंजस्य और आपसी ताल मेल की कमी है। पहले डॉक्टर द्वारा मरीज को कोरोना संदिग्ध बताना और फिर बाद में अस्पताल प्रबन्धन द्वारा इसका खंडन किया जाना। वही प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी ऐसा ही कुछ नजर आया जहा मास्क की कॉलेटी और गुणवक्ता को लेकर प्रबन्धन से जुड़े अधिकारी और डॉक्टर आपस में ही उलझते नजर आये।


Comments (0)
Facebook Comments