बजट पर कोरोना की परछाई, नहीं होगी बजट की छपाई, टूटेगी 73 साल पुरानी परंपरा

Corona's shadow on the budget, budget printing will not happen, 73 years old tradition will break

बजट पर कोरोना की परछाई, नहीं होगी बजट की छपाई, टूटेगी 73 साल पुरानी परंपरा
रिपोर्ट। ब्यूरो CTN भारत, नई दिल्ली

बजट पर कोरोना की परछाई, नहीं होगी बजट की छपाई, टूटेगी 73 साल पुरानी परंपरा

आखिरकार कोरोना की परछाई 73 साल पुरानी बजट परंपरा पर भी पड़ गई। आजाद भारत में 26 नवंबर 1947 को पहली बार बजट के रूप में वित्तीय लेखाजोखा पेश किया गया था। तब से संसद में पेश होने वाले बजट की छपाई का चलन है।

नई दिल्ली। कोरोना काल में 73 साल पुरानी परंपरा टूटने जा रही है। इस बार 2021-22 के बजट दस्तावेज नहीं छापे जाएंगे। लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने सरकार को इसकी मंजूरी दे दी है। सभी सांसदों को इस बार बजट के दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी मुहैया कराई जाएगी। दस्तावेजों की छपाई के लिए 100 से ज्यादा लोगों को 2 हफ्ते तक एक ही जगह पर रखना होता है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। 1947 से हर साल बजट दस्तावेज छपते थे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहली फरवरी को सॉफ्ट कॉपी से पेश करेंगी बजट

वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार पहली फरवरी को सॉफ्ट कॉपी से बजट पेश करेंगी। सांसदों को भी बजट की हार्ड कॉपी यानी छपी हुई प्रति नहीं दी जाएगी। बजट के अलावा इस वर्ष आर्थिक सर्वे की भी छपाई नहीं हो रही है। इन परंपराओं को इसलिए तोड़ना पड़ रहा है क्योंकि बजट की छपाई अति गोपनीय तरीके से होती है। छपाई के दौरान एक साथ 50 से अधिक कर्मचारी वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक में लगभग 15 दिनों तक अपने घर-परिवार से पूरी तरह दूर एक साथ रहते हैं, जो कोरोना के इस दौर में संभव नहीं है। बजट की छपाई में लगने वाले कर्मचारियों को बाहर निकलने की इजाजत देने से बजट के लीक होने की आशंका रहेगी। सूत्रों के मुताबिक इन तमाम पहलुओं को देखते हुए इस बार बजट को छापने की जगह उसे पूरी तरह से सॉफ्ट रूप में पेश किया जाएगा।