21 साल बाद 'ऑपरेशन विजय'की कुछ अनसुनी दास्तान....
Kargil Vijay Diwas
21 साल बाद 'ऑपरेशन विजय' की कुछ अनसुनी दास्तान....
- आज 26 जुलाई है, आज का दिन बहुत खास है। आज ‘कारगिल विजय दिवस’ है.....
वर्ष 1999 मई के शुरुआती दिन भारत में एक तरफ क्रिकेट विश्व कप का माहौल छाया हुआ था। तो दूसरी तरफ सरहदों में तनाव के बादल छाए हुए थे । कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि हालात क्या है । पर समय के साथ तस्वीर साफ हुई और पता चला कि दुश्मनों ने भारत की सीमा के अंदर लगभग 10 किलोमीटर तक कब्जा कर रखा है और खाली पड़ी हुई भारतीय चौकियों को अपना ठिकाना बना लिया है। यह क्षेत्र था कारगिल ऊंची- ऊंची पहाड़ियों वाला यह दुर्गम क्षेत्र है और पहाड़ों पर बैठा दुश्मन यदि एक छोटा पत्थर भी फेंके तो नीचे वालों पे बड़ी चोट कर सकता हैं।
सबसे पहले ताशी ने दी खबर भारतीय फौज को...
गरकौन गांव (कारगिल )के रहने वाले ताशी नामग्याल ने कुछ लोगों को देखा जो कुछ अलग लगे ।उन्होंने देखा पहाड़ियों के पास कुछ चार- पांच लोग ऊपर की तरफ जा रहे थे। तो ताशी को शक हुआ और वह आगे बढ़े कुछ देर रुक के उन पर नजर रखी ।ताशी को समझ आ गया कि यह लोग भारतीय नहीं है। बिना देर किए ताशी ने इसकी सूचना भारतीय फौज को दी जिससे भारतीय फौज सतर्क हो गई और आगे की कार्रवाई शुरू हुई।
दुश्मन की रणनीति थी श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय मार्ग पर कब्जा...
पूरी तैयारी के साथ टाइगर हिल और तोलो लिंग की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर बैठे घुसपैठिय और उनका साथ पाकिस्तान की सेना भी दे रही थी। मकसद था, राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह से सियाचिन से अलग कर दिया जाए। जिससे सेना को सियाचिन के लिए कोई भी मदद ना मिल सके ,ऊंची पहाड़ियों से लगातार सेना के काफिले पर सेलिंग होती रहती। इसलिए सेना के वाहन रात में राजमार्ग से गुजरते वो भी बिना हैडलाइन चलाएं।
दुश्मन की बहादुरी की कद्र करें यह है भारतीय फौज...
ऐसा बहुत कम सुनने को मिलता है कि दुश्मन की कोई तारीफ करें। लेकिन दुश्मनी में भी इंसानियत रखना यही है भारतीय फौज ।जहां पाकिस्तानी सैनिकों की लाश को पूरे धर्म के साथ दफनाया। वही उनके एक कैप्टन जिनका नाम कर्नल शेरखान था। उसकी लाश को श्रीनगर से दिल्ली भेजा और पाकिस्तानी उच्च आयोग को सबूत दिए गए कि यह पाकिस्तानी कैप्टन है । फिर पाकिस्तान ने इस लाश को कबूला ।इतना ही नहीं भारतीय फौज ने एक चिट्ठी भी भेजी जिसमें कैप्टन के टाइगरहिल की लड़ाई का पूरा उल्लेख किया गया था और उस चिट्ठी की बदौलत इस कैप्टन को पाकिस्तानी सेना ने निशान-ए- हैदर से सम्मानित किया। शेर खान के पिता ने भारतीय फौज को खत लिखकर उनका शुक्रिया कहा ।उन्होंने खत में लिखा आपने मेरे बेटे की बहादुरी को जाया नहीं जाने दिया आपकी उस चिट्ठी की वजह से मेरे बेटे को सम्मान मिला। आप के इस कदम का मैं आभारी हूं।
भारतीय वायुसेना का ऑपरेशन सफेद सागर....
ऊंची पहाड़ियों में मजबूत पोजीशन पर बैठे दुश्मन को बिना वायुसेना की मदद के कमजोर करना बहुत मुश्किल था ।इसलिए भारतीय वायुसेना ने 26 मई से अपना ऑपरेशन सफेद सागर शुरू किया लगातार वायुसेना के इस हमले ने दुश्मन के बंकर तबाह कर दिये और दुश्मन को मुंह की खानी पड़ी ।इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा शहीद हो गए और एक फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को पाकिस्तानियों ने बंदी बना लिया था। जिसे कुछ दिनों बाद भारत को सही सलामत वापस कर दिया गया।
16 जुलाई तक भारतीय फौज अपनी काफी चौकियों को दुश्मन से खाली करा चुकि थीं। फिर राजनीति स्तर पर समझौते के बाद आदेश दिया गया कि दुश्मन ने अपनी हार मान ली है और वह पीछे हटना चाहता है ।सीजफायर के बाद दुश्मन को वापस जाने दिया गया ।भारतीय फौज ने एक-एक पॉइंट को चेक किया और अपना कब्जा जमाने के बाद कहा कि हमारी धरती पर अब एक भी दुश्मन नहीं है। 26 जुलाई 1999 को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने ऑपरेशन विजय को कामयाब बताया।
जंग का नतीजा कुछ भी हो हर जंग की कीमत होती है और इस जंग में भी 527 भारतीय फौजी शहीद हुए और लगभग 1300 घायल।
"सोचे थे, वो की ऊंची पहाड़ियों पर है अब कौन है जो हमें हटाएगा। वे ये भूल गए थे, मातृभूमि के लाल हैं हम सर कटाना ही नहीं सर काटना भी जानते हैं। खदेड़ के अपनी जमीन से दम लिया हमने पड़ी थी लाश दुश्मन की हमारे सामने उनके देश ने तो पहचाना ही नहीं। हमने दफनाया पूरे सम्मान के साथ यही है भारतीय फौज"
जय हिंद


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