आखिर शिक्षक ने पत्रकारों को रूपये क्यों दिए ? बड़ा सवाल
आखिर शिक्षक ने पत्रकारों को रूपये क्यों दिए ? बड़ा सवाल
आखिर शिक्षक ने पत्रकारों को रूपये क्यों दिए ? बड़ा सवाल
क्या मध्यान भोजन में फर्जीवाड़ा चल रहा था ?
इन दिनों पत्रकारों के द्वारा अवैध वसूली करने का मामला हर दिन सामने आ रहा है ऐसा ही एक मामला छिंदवाड़ा जिले के तामिया तहसील से देखने को मिला जहां 3 युवक फर्जी पत्रकार बनकर कर रहे थे स्कूलो से अवैध वसूली।
पूरा मामला तामिया ब्लाक के ग्राम पंचायत इटावा के झीलपिपरिया के प्राथमिक शाला का हे जहा पत्रकारों ने मध्यान भोजन की जानकारी ली और मेनू के साथ खाना न होने के कारण बच्चों को केवल चावल परोसा गया था। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने शिक्षक को धमकाया और शिक्षक विश्राम डाडोलिया से पैसे की मांग की शिक्षक ने डर के कारण 10000 हजार रूपए आरोपियों को दिए। जैसे ही इसकी जानकारी बीआरसी जीतेन्द्र छोकर को लगी तो उन्होंने उनका पीछा कर तामिया घाट में पत्रकारों को रोका और तामिया थाना प्रभारी मोहनसिंह मर्सकोले को मौके पर बुलवाकर मामले को जांच में लिया।
पुलिस की पूछताछ पर फर्जी पत्रकार बैतूल निवासी आबिदशाह, अविनाश उईके और मेहफूज खान के ऊपर धारा 294,384,भादवी,3,1द,ध,एस सी एस टी ऐक्ट के तहत कार्रवाई की गई जिसमें तामिया थाना की पुलिस टीम थाना प्रभारी मोहनसिंह मर्सकोले, आरक्षक हितेश शर्मा, आयुब खान, सुनील अहके एवं समस्त टीम मौजूद रहे।
कहानी का मुख्य भाग ये भी है
बात यही ख़त्म नहीं होती, माना पत्रकार फर्जी थे और पुलिस के द्वारा साबित भी हो गया और आरोपियों ने गलती तो की जिसकी सजा कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से मिलेगी परन्तु उस मध्यान भोजन का फर्जीवाड़ा एक फर्जी पत्रकार ने उजाकर कर कही ना कही उस शिक्षक को भी संदेह के घेरे में ला कर खड़ा कर दिया जिसने डर के कारण 10 हजार रूपये पत्रकारों को दिए थे।
ऐसे कई फर्जी पत्रकार छिन्दवाड़ा में कुकरमुत्ते की तरह पनप रहे हे और अधिकारिओं को ब्लेकमेल करके लाखो न्यारे वायरे कर रहे हे परन्तु यदि अधिकारी और कर्मचारी ईमानदार बन जाये तो ये फर्जी पत्रकार धीरे धीरे स्वम ही अपनी दुकानदारी बंद कर देंगे
अब देखना है की प्रशासन क्या वाकई जांच करता है या नहीं ? इस खबर के माध्यम से मध्यान भोजन में परोसा गया भोजन मेनू के अनुसार था या नहीं ?


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