मप्र उपचुनाव : सत्ता हासिल करने से कांग्रेस कितने कदम दूर, भाजपा के अपने समीकरण में कुछ और कांग्रेसी को लाने की तैयारी

MP by-election: How far Congress is from gaining power, BJP preparing to bring some more Congress in its equation

मप्र उपचुनाव : सत्ता हासिल करने से कांग्रेस कितने कदम दूर, भाजपा के अपने समीकरण में कुछ और कांग्रेसी को लाने की तैयारी
रिपोर्ट। ब्यूरो CTN भारत, भोपाल

मप्र उपचुनाव : सत्ता हासिल करने से कांग्रेस कितने कदम दूर, भाजपा के अपने समीकरण में कुछ और कांग्रेसी को लाने की तैयारी

भोपाल। मध्यप्रदेश में कमलनाथ की महज 15 महीनो की सरकार में ऐसा आखिर ऐसा क्या हुआ की एक के बाद एक कई के विधायकों के टूटने के बाद सरकार भाजपा के पाले में आ गई थी और ये सिलसिला अब उपचुनाव में भी जारी है। कल राहुल सिंह लोधी के कांग्रेस  पार्टी से इस्तीफा देते ही कांग्रेस को 26 विधायक का झटका लगा है और इसके साथ ही सत्ता में वापसी की राह से कांग्रेस एक कदम और पीछे हो गई है। अब ऐसे में जहां कांग्रेस को सत्ता में वापसी मुश्किल दिखाई दे रही है । वहीं कांग्रेस के मुकाबले भाजपा को अपनी राह लगातार आसान नजर दिखाई दे रही है।

दरअसल मध्य प्रदेश में होने वाले 28 सीटों पर उपचुनाव के कुछ दिन पहले ही कांग्रेस से विधायक बीजेपी में शामिल हो गया। दमोह सीट से विधायक राहुल सिंह लोधी के पद से इस्तीफा देने के साथ ही विधानसभा की एक और सीट रिक्त घोषित कर दी गई। इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद ही भाजपा दफ्तर में दिग्गज नेताओ की मौजूदगी में राहुल ने बीजेपी का दामन थाम लिया।

राहुल लोधी ने पूर्व मुख़्यमंत्री कमलनाथ पर लगाए कई आरोप
एक तरफ जहां बीजेपी इसे कांग्रेस के नेतृत्व क्षमता की कमी बता रही है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस एक बार फिर बीजेपी पर विधायक खरीदने का आरोप लगा रही है। पार्टी छोड़ने के बाद राहुल लोधी ने कमलनाथ पर कई आरोप लगाए। राहुल लोधी ने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ ने आश्वासन दिया था कि दमोह में मेडिकल कॉलेज खोला जाएगा लेकिन 15 महीने के शासनकाल में दमोह के लिए किसी भी तरह के विकास कार्य नहीं हुए। जनता से जो वादे मैंने किए थे। उसे अब शिवराज सरकार पूरा करेगी।

कुछ और कांग्रेसी संपर्क में - बीजेपी
वहीं दूसरी तरफ कमलनाथ, दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गजों ने बीजेपी पर विधायक खरीद-फरोख्त का इल्ज़ाम लगाया है। किंतु कांग्रेस के पाले से 26 विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं जिसके बाद विधानसभा में कांग्रेस के 87 विधायक बचे हैं। वहीं बीजेपी का कहना है कि कुछ और कांग्रेसी उनके संपर्क में है। बीजेपी की तरफ से माने तो राहुल के बीजेपी में शामिल होने के बाद कुछ और कांग्रेस के विधायक भाजपा के संपर्क में होने की चर्चा तेज है। हलाकि इस बात में कितनी सच्चाई है ये वक्त ही बताएगा। 

सत्ता पाने का और प्रदेश में सरकार बनाने का पहला समीकरण
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या 107 है। वहीं कांग्रेस पार्टी के विधायकों की संख्या घटकर 87 पहुंच गई है। जिसके बाद एक सिर्फ रिक्त होने से सदन में संख्या पर 229 माना जा रहा है। इसके आधार पर 115 सीट बहुमत साबित होगी। इस हिसाब से बीजेपी को बहुमत हासिल करने के लिए 8 सीटों पर जीत दर्ज करने की जरूरत है जबकि कांग्रेस को 28 सीट जीतना जरूरी है।

सत्ता पाने का और प्रदेश में सरकार बनाने का दूसरा समीकरण
वहीं दूसरे समीकरण की बात करें तो 7 ऐसे विधायक हैं जो सत्ता पक्ष के साथ रहने की बात पहले ही कर चुके हैं। जिसके बाद सत्ता तक पहुंचने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या 108 मानी जा रही है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के पास 87 विधायकों की संख्या है और उसे सत्ता हासिल करने के लिए 21 सीटों पर जीत की जरूरत है। वहीं भारतीय जनता का पार्टी के पास 107 विधायक बल मौजूद है और उसे सत्ता में बने रहने के लिए एक सीट पर जीत हासिल करनी होगी।