महाशिवरात्रि पर विशेष
Special on mahashivratri
महाशिवरात्रि पर विशेष
महाशिवरात्रि परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण का मंगल सूचक है।उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही महाशिवरात्रि कहलाती है ।फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुदर्शी की रात्रि को आदिदेव भगवान शिव करोड़ो सूर्य के समान प्रभा वाले लिंग के रूप में प्रगट हुए अतः इस लिए इसे महाशिवरात्रि कहा गया।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दसी तिथी में चंद्रमा सूर्य के समीप होता है अतः यही समय जीवन रूपी चंद्रमा का शिव रूपी सूर्य के साथ योग मिलन होता है। मनुष्य को शिव पूजन करने से अभीष्ट कामनाओ की पूर्ती होती है। महाशिवरात्रि यह वह रात्रि है जिसका शिव तत्व के साथ अत्यंत घनिष्ट सम्बन्ध है ।भगवान शिव के अतिप्रिय रात्रि को ही महाशिवरात्रि कहा गया है।
ज्योतिष आचार्य दशरथ नंदन द्विवेदी महाराज कहते हैं:-पुरी रात्रि जागरण कर शिव जी का अभिषेक पूजन होता है ।महाशिवरात्रि की रात्रि को 4 पहर की पूजन अभिषेक का विधान है। प्रथम पहर संध्या 6 से 9 बजे तक रहेगा दूसरा पहर 9 से 12 तीसरा पहर 12 से 3 बजे तक और चौथा पहर 3 बजे रात्रि के बाद पूजन में विशेष रूप से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करे गंगा जल और पवित्र नदियों के जल से स्नान कराये पंचामृत से स्नान कराये महादेव जी को सफेद वस्त्र अर्पण कर पार्वती जी को साड़ी चुनरी अर्पण करे बेलपत्र ,शमीपत्र, मंदार पुष्प अर्पित करे।ऋतुफल, भांग,पान सुपाड़ी ,द्रव्य अर्पण कर पूजन करे फिर महादेव का अभिषेक करें।
अनेक कामनाओ के लिए अभिषेक की वस्तुएं कही गई है ।
धन लष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रश से अभिषेक करें, रोगों की शांति के लिए कुशा को जल में डाल कर ।सुंदर संतान और दीर्घ आयु हेतु गाय के दूध से, पाप मुक्ति एवं धन के लिए मधुरस से,हर प्रकार के कल्याण हेतु घी से ,ज्वर शांति हेतु जल से,शिवलोक प्राप्ति हेतु तीर्थ के जल से अभिषेक करें।


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