मप्र में महंगी हो सकती है शराब, सरकारी खजाने को भरने के लिए सरकार लगाएगी 'कोरोना टैक्स'
Liquor can be expensive in MP, government will impose 'corona tax' to fill government treasury...
मप्र में महंगी हो सकती है शराब, सरकारी खजाने को भरने के लिए सरकार लगाएगी 'कोरोना टैक्स'
सरकारी खजाने को भरने के लिए अहम भूमिका में शराब ठेकेदार ....
छिंदवाड़ा / भोपाल
इस वक्त प्रदेश सहित पूरा भारत कोरोना सकंट से जूझ रहा है इसी के चलते प्रदेश के खजाने की आर्थिक स्थिति भी दिन ब दिन कमजोर होती नजर आती दिखाई दे रही है ऐसे में प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व में भागीदारी शराब ठेकेदारों Liquor contractors के द्वारा ही मिलता है
बता दें कि इससे पहले मंगलवार को राज्य सरकार ने शराब ठेकेदारो की जुगलबंदी के सामने घुटने टेकते हुए शराब दुकानों को दिनभर खोलने की अनुमति दी थी। वाणिज्य कर विभाग से एक आदेश जारी किया गया है जिसमें शराब की दुकानें सुबह 7:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक खोलने का निर्णय लिया गया।
गोरतलब है कि भोपाल, इंदौर और जबलपुर सहित लगभग 30 शराब ठेकेदारों ने हाईकोर्ट के तय समय में कमी और बिड (bid) के दौरान उनसे ली गई राशि को भी कम किया जाना को लेकर एवं दुकानों के खोलने के समय में कमी के बाद भी उनसे पूर्व निर्धारित राशि को कम क्यों नहीं किया जा रहा है। इस मामले में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एके मित्तल व न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस (notice) जारी किया है और 2 हफ्ते में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मई को होनी बाकी है हालांकि प्रदेश सरकार सुनवाई के पहले ही समय सीमा को सुबह 7:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक बढ़ा तो दिया परन्तु वही ठेकेदारों का भी कहना है की शाम 7:00 बजे के बाद ही लोग शराब ज्यादा खरीदने आते है वही देखना है की अगली सुनवाई के बाद क्या निर्णय सामने आता है
दरअसल दो दिन पहले जब शराब की दुकानें खोलने का निर्णय हुआ था, उस समय हर जिले के कलेक्टर ने अपने अपने हिसाब से शराब की दुकानें 5 से 6 घंटे खोलने का निर्णय लिया था, जिसके विरोध में शराब व्यवसायियों ने दुकानें बंद रखने और उसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाने का निर्णय लिया । इसके बाद आनन-फानन में सरकार ने यह निर्णय लिया कि अब शराब की दुकाने 12 घंटे के लिए खुलेंगी। हालांकि रेड जोन में आने वाले भोपाल इंदौर और उज्जैन जिले में अभी शराब की दुकानें नहीं खोली जाएंगी । वहीं रेड जोन के अन्य क्षेत्रों में केवल ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानें खोली जाएंगी, ऑरेंज जोन में कंटेनमेंट एरिया को छोड़कर शहरी और ग्रामीण सभी दुकानें खुल सकेंगी। जबकि ग्रीन जोन में सारी शराब की दुकानें खोली जाएंगी। सरकार का तर्क है कि अप्रैल से लेकर अब तक उसे (1800) अट्ठारह सौ करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो चुका है, हालांकि अन्य राज्यों में शराब की दुकानें खुलने के बाद शराब दुकानों पर उमड़ी भीड़ और बिगड़ती सोशल डिस्टेंसिंग में कही न कही कोरोना के खतरे को भी सरकार और प्रशासन को भूलना नहीं चाहिए वैसे तो शराब की दुकान खोलना किसी भी प्रकार से जनहित में नहीं है और यह कोरोना फैलाने में एक महत्वपूर्ण तत्व साबित भी हो सकता है। उसके बावजूद राजस्व घाटे की पूर्ति के लिए सरकार को यह निर्णय लेने पर मजबूर कर रही है।
केंद्र सरकार द्वारा लॉक डाउन 3 की नई गाइडलाइन जारी करने के बाद कई राज्यों कोरोना टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है| वहीं मध्य प्रदेश सरकार भी इस संबंध में जल्द ही फैसला ले सकती है, इसको लेकर विचार चल रहा है| अतिरिक्त टैक्स से हजारों करोड़ रुपए की आय होगी, जिससे दो महीने में हुए राजस्व के नुकसान की भरपाई हो जायेगी| इसके अलावा सरकार पेट्रोल डीजल भी महंगा कर सकती है| लॉकडाउन के चलते मध्यप्रदेश सरकार को 1800 करोड़ रुपए के राजस्व की हानि हुई है। अब इस नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं है| इसलिए सरकार ने केंद्र सरकार की गाइडलाइन के बाद शराब दुकानों को खोलने का निर्णय लिया।
वही छिंदवाड़ा शराब ठेकेदार अज्जू ठाकुर का कहना है की दुकानें संचालित करने के लिए हमारी सरकार के साथ बैठक हुई है जिसमें हमने सरकार के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहां है कि जो रेवेन्यू पार्ट है वह हमें जनता से कलेक्ट करना है और मार्केट की स्थिति ऐसी नहीं है कि हम रेवेन्यू पार्ट को दे पाए क्योंकि हमारे ठेके 22 मार्च को जब जनता कर्फ्यू लगा उसके पहले हो चुके थे और उसके बाद परिस्थितियां बदलती गई पहले की अपेक्षा आज की परिस्थिति में मार्केट में काफी फर्क है सरकार से हमने मांग की है हमें इसमें राहत दी जाए जिससे कि हम शराब की दुकानें संचालित कर सके और शासन को राजस्व दे पाए
अज्जू ठाकुर (शराब ठेकेदार ) Liquor contractor


Comments (0)
Facebook Comments