COVID -19 : जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 188

Under this section, a provision has been made to punish a person disobedience of an order promulgated by a public servant.

COVID -19 : जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 188
रिपोर्ट - दीपक कोल्हे (एडिटर)

COVID -19 : जानिए क्या कहती है आईपीसी की धारा 188, क्या हो सकते हैंं प्रशासन के आदेश की अवज्ञा के परिणाम

कोरोना वायरस इस भयंकर महामारी के बढ़ते असर को देखते हुए देश में तमाम जगहों पर प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी करते हुए यह आदेश जारी किया है कि तमाम दुकाने (आवश्यक वस्तुओं को बेचने वाली दुकानों को छोड़कर), रेस्तरां, पब, म्यूजियम, डिस्को, पर्यटन स्थल इत्यादि बंद कर दिए जाएँ। यह आदेश इस वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए जारी किये जा रहे हैं। हम सभी अब तक यह जान ही चुके हैं कि कैसे यह वायरस पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है और अब यह भारत में भी अपने पाँव तेज़ी पसार रहा है। इस आदेश के साथ यह भी सख्त हिदायत दी जा रही है कि पुलिस और जिले के अधिकारी, इलाकों में गश्त करेंगे और यदि इन आदेशों की अवज्ञा/अवहेलना की जाएगी तो उल्लंघन करने वालों पर आईपीसी की धारा 188 (सरकारी अधिकारी की अवज्ञा) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा, जिसमें एक महीने की कैद और 1,000 रुपये का जुर्माना है।

क्या है भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188?

इस धारा के अंतर्गत लोक सेवक (Public Servant) द्वारा प्रख्यापित (Promulgated) किसी आदेश (Order) की अवज्ञा (Disobedience) करने वाले व्यक्ति को दण्डित करने का प्रावधान किया गया है।